Thursday, 19 November 2020

 


गुरु/बृहस्पति का मकर राशि में गोचर का फल 

गुरु/बृहस्पति धनु राशि से निकल कर मकर राशि में गोचर कर रहे हैं. ऎसे में बृहस्पति का यह गोचर बहुत से बदलावों को दिखाने वाला होगा, जो विश्वव्यापी प्रभाव लाएगा. इस चेंज का अधिक प्रभाव इस लिये भी दिखाई देगा क्योंकि मकर राशि में पहले से ही शनि मौजूद हैं ऎसे में बृहस्पति का यहां होना और महत्वपूर्ण ग्रहों का एक साथ आना ज्योतिष की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण घटना भी है. इन तीन ग्रहों के गोचर का एक साथ युति में होना उन्मांद को बढ़ाने वाला हो सकता है. विश्व पर यह नए बदलावों और तनाव को दिखा सकता है. आईये जानते हैं सभी 12 राशियों पर गुरु के गोचर का प्रभाव 


मेष राशि 

मेष राशि वालों को कार्यक्षेत्र में बदलाव दिखाई देंगे. इस समय घर और नौकरी दोनों ही क्षेत्रों में चेंज होगा जिसका लम्बा असर पड़ेगा.मेहनत का सकारात्मक फल मिलेगा. जरुरी चीजों की पूर्ति बनी रहेगी. 

उपाय - गुरु जनों व बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त करें. 


वृष राशि 

वृष राशि वालों को भाग्य का सहयोग मिलेगा. अचानक से काम पूरे होंगे. मेहनत अधिक रह सकती है. धार्मिक क्षेत्र में आपका झुकाव रह सकता है और आद्यात्मिक पक्ष मजबूत होगा. छोटे भाई बहनों के साथ समय बिताएंगे.

उपाय - शिवलिंग पर जलाभिषेक नियमित रुप से करें.


मिथुन राशि 

मिथुन राशि वालों को इस समय संभल कर काम करने की आवश्यकता है. खर्चों में कमी नहीं आने वाली. स्वास्थ्य संबंधी परेशानी रह सकती है. पेट के नीचले हिस्से मे दर्द एवं त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं. पैतृक संपत्ति से लाभ दिखाई देता है. 

उपाय - गाय को हरा चारा खिलाएं 


कर्क राशि 

कर्क राशि वाले वैवाहिक जीवन और प्रेम संबंधों को लेकर अधिक सोच विचार में रहने वाले हैं. रिसर्च के काम बेहतर तरह से हो पाएंगे.  स्वास्थ्य का ख्याल रखें चोट एव दर्द की शिकायत रह सकती है. 

उपाय - खीर में केसर डाल कर गरीबों में बांटें. 


सिंह राशि 

सिंह राशि वालों के लिए भागदौड़ अधिक रहने वाली है. वाद-विवाद से बचें, नौकरीपेशा लोगों के लिए दिक्कतें अधिक बढ़ सकती हैं. स्वास्थ्य का ख्याल रखें और विरोधियों से बचें. जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लें. 

उपाय - मंदिर में विष्णु भगवान के समक्ष दीपक प्रज्जवलित करें.


कन्या राशि 

कन्या राशि वाले शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कर सकते हैं. इस समय अचानक से स्थान परिवर्तन और बदलाव दिखाई देगा.  संतान को लेकर कुछ चिंता रहेगी इसलिए ध्यान रखें. 

उपाय - गायत्री मंत्र का नियमित रुप से जाप करें. 


तुला राशि 

तुला राशि वालों को बेचैनी अधिक रहने वाली है लेकिन जल्द ही स्थिति आपके मन अनुरुप भी होगी. परिवार में माता को लेकर चिंता रह सकती है. छाती में या हृदय से संबंधी परेशानी हो सकती है. नौकरी में बदलाव का अभी विचार न बनाएं. 

उपाय - श्री सूक्त का पाठ करें. 


वृश्चिक राशि 

वृश्चिक राशि वालों के लिए ये समय परिश्रम बढ़ाने वाला होगा. आप उत्साहित होंगे और ऎसे में कुछ अधिक जल्दबाजी से बचना बेहतर होगा. क्रोध पर नियंत्रण रखें और परिवार की सुनें. भाग्य का सहयोग मिलेगा. 

उपाय - मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें.


धनु राशि 

धनु राशि वालों के लिए खर्च अधिक होंगे और बचत कुछ कम. शुरुआती समय थोड़ा अधिक खर्चीला होगा. स्वास्थ्य का ध्यान रखें. पारिवारिक उलझनें बढ़ सकती हैं. 

उपाय - कुत्ते को रोटी डालें. 


मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए ये समय कुछ तनाव बढ़ा सकता है. दांपत्य जीवन में भी उतार-चढ़ाव अधिक रह सकते हैं. अधिक क्रोध से बचें ओर जो भी काम करें उस पर राय लेना बेहतर होगा. 

उपाय - शनिवार के दिन शनि स्त्रोत का पाठ किया करें.


कुम्भ राशि 

कुम्भ राशि वालों के लिए समय काफी व्यस्तता ला सकता है. मानसिक रुप से भी अभी आप सोच विचार में अधिक रहने वाले हैं. स्थान परिवर्तन के योग भी दिखाई देते हैं. स्वास्थ्य का ध्यान रखें और वाहन का उपयोग संभल कर करें. 

उपाय - शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष पर सरसों के तेल का दीपक जरुर जलाया करें. 


मीन राशि 

मीन राशि वालों को थकान अधिक रह सकती है. छोटी-छोटी बातों को लेकर कुछ चिंताएं अधिक रहेंगे. शुगर एवं मोटापे की समस्या के चलते परेशानी हो सकती है. ट्रैवलिंग होगी और अचानक से यात्रा बनेगी. संतान को लेकर थोड़ा अधिक ध्यान रखें. 

उपाय - केले के वृक्ष का पूजन करें. 

Saturday, 10 October 2020

 


पुरूषोत्तमा एकादशी , अधिक मास की एकादशी

मल मास अर्थात अधिक मास इस मास में आने वाली एकादशी को ही पुरूषोत्तमा एकादशी के नाम से जाना जाता है. ये एकादशी बहुत अधिक खास होती है. इस दिन किया गया एकादशी पूजन आपके पुण्यों में वृद्धि करता है और आपके अपराधों की शांति भी होती है. इस दिन की एकादशी का वर्णन हमें विष्णु पुराण, स्कंद पुराण इत्यादि धर्म ग्रंथों में प्राप्त होता है. जहां पर एकादशी की महिमा का बहुत ही सुंदर शब्दों में विस्तारपूर्वक वर्णन प्राप्त होता है.  .


क्यों होती है पुरूषोत्तमा एकादशी इतनी खास ?

पुरूषोत्तमा एकादशी की महिमा अत्यंत ही विरल है. यह एकादशी समस्त एकादशियों से अलग होती है और इसका एक विशेष महत्व भी होता है. पुरुषोतमा एकादशी को इसलिए भी इतना खास इस कारण से माना गया है क्योंकि इस एकादशी को हम प्रतिवर्ष नही देख पाते है. प्रत्येक तीन वर्ष के पश्चात ही हमें इस एकादशी के दर्शन होते हैं. इस कारण से पुरुषोत्तमा एकादशी की महिमा सबसे अलग और विशिष्ट मानी गयी है. 


कब किया जाता है पुरुषोत्तमा एकादशी का व्रत ?

पुरूषोत्तमा एकादशी का व्रत और इसका पूजन अधिक मास में ही किया जाता है. अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है अत: इस मास में आने वाली एकादशी पुरुषोत्तमा एकादशी भी कहलाती है. महाभारत के आदि पर्व में धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से इस एकादशी के विषय में जानने की इच्छा व्यक्त की थी. वह भगवान श्री कृष्ण से पूछते हैं कि "हे जनार्दन  मुझे पुरुषोत्तम मास की एकादशी की महिमा बताने का कष्ट करें उनके इस प्रश्न पर भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि हे धर्मराज पुरूषोत्तमा एकादशी अपराधों का नाश करने वाली, मनुष्यों का कल्याण करने वाली और मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली होती है. 


कैसे की जाती है पुरूषोत्तमा एकादशी पूजा और उपासना 

अधिक मास में आने वाली इस महत्वपूर्ण एकादशी के दिन उपासना और व्रत इत्यादि का संकल्प लेकर दिन का आरंभ करना चाहिए. उपासक को चाहिए की प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त समय उठकर स्नान इत्यादि दैनिक कार्यों से निवृत होकर एकादशी का पूजन आरंभ करना चाहिए. इस दिन एकादशी के नियमों का पालन करते हुए ही व्रत का संकल्प पूरा करना चाहिए. शुद्ध चित्त से श्री हरि के नाम का स्मरण दिन भर करते रहना चाहिए. निराहार या फिर फलाहार द्वारा जैसा भी सामर्थ्य हो एकादशी व्रत को धारण करना चाहिए. सभी प्रकार के व्यसनों का परित्याग करते हुए सात्विक रुप से दिन व्यतीत करना चाहिए. भगवान श्री विष्णु जी का षोडशोपचार पूजन प्रात:काल और संध्या समय करना चाहिए. 


पुरूषोत्तमा एकादशी व्रत कथा से दूर होते हैं सभी कष्ट 

पुरूषोत्तमा एकादशी के दिन उपासक को चाहिए की एकादशी कथा का श्रवण अवश्य करे. पुरूषोत्तमा एकादशी व्रत कथा का आरंभ प्राचीन काल की एक नगरी अवंतिपुरी में होता है. उस नगर में शिवशर्मा नाम का ब्राह्मण अपने पुत्रों के साथ निवास करता था. उसका सबसे छोटा पुत्र गलत कार्यों की ओर उन्मुख हो जाता है जिस कारण परिवार से उसे निकाल दिया जाता है. वह लड़का परिवार से अलग होकर भटकने लगता है और एक दिन प्रयाग जा पहुंचता है. 


वह भोजन की तलाश में मारा-मारा फिरता है पर उसे कहीम भोजन नही मिलता वह व्याकुल होकर त्रिवेणी के जल से स्नान करने लगता है और जल पीकर अपनी भूख मिटाने की कोशिश करता है. सौभाग्य वश वह अधिकमास की एकादशी का दिन होता है. त्रिवेणी में मुनियों के मुख से उसे एकादशी की कथा भी सुनने को मिलती है. भूख से व्याकुल ही वह सो जाता है और स्वप्न में ईश्वर के दर्शन होते हैं और उसके सभी पापों का नाश होता है. वह लड़का सदगति को प्राप्त करता है. श्री विष्णु की भक्ति में लिप्त होकर सम्मानित जीवन व्यतीत करता है.अत: पुरुषोत्तमा एकादशी के दिन अंजाने में किए हुए व्रत का लाभ जिस प्रकार से उस ब्राह्मण के पुत्र को प्राप्त हुआ उसी प्रकार हम सभी को भी एकादशी के शुभ फलों की प्राप्ति हो. नारायण हरि ओम.